Last Updated: November 4, 2022

Odia Medium Class 8 Hindi Chapter 7 Prakruti Ka Sandesh ( प्रकृति का संदेश ) Question & Answer

Odia Medium Class 8 Hindi Chapter 7 Prakruti Ka Sandesh ( प्रकृति का संदेश ) Question & Answer

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Odia Medium Class 8 Hindi Chapter 7 Prakruti Ka Sandesh ( प्रकृति का संदेश ) Question & Answer

प्रकृति का संदेश



1. नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए :


क.  पर्वत और सागर क्या – क्या कहते हैं ?

उ : पर्वत कहता है – तुम शशि उठाकर ऊंचा बन जाओ और सागर कहता है – तुम लहराकर मन में गहराई लाओ |


ख.  पृथ्वी का क्या कहना है ?

उ : पृथ्वी का यह कहना है कि – तुम्हारे सिर पर कितना भी मार कियों न हो; तुम कभी भी धैर्य न छोड़ना |


ग.  तरंग का संदेश क्या है ?

उ : तरंग का संदेश यह है कि, तुम अपने मन मे मीठी मृदुल उमंग भर लो |


घ.  नभ क्या कहता है ?

उ : नभ यह कहता है कि – तुम इतना फैलो कि सारा संसार को ढक लो |


ङ.   धैर्य न छोड़ने के लिए कौन कहती है ?

उ : धैर्य न छोड़ने के लिए पृथिवी कहती है |



2. इन प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए :


क.  पर्वत कि ऊंचाई से हम क्या सीखें ?

उ : पर्वत कि ऊंचाई से हम यह सीखें कि – हम अच्छा कर्म करके पर्वत कि तरह ऊंचा बन सकते हैं और शीश उठाकर सम्मानपूर्वक जी सकते हैं |


ख.  मन में गहराई लाने का क्या मतलब है ?

उ : मन में गहराई लाने का मतलब है – मन में अच्छे भावना और सकरात्मक विचार रखना |


ग.  हमारे सिर पर बोझ बढ़े तो हमें क्या करना चाइए ?

उ : हमारे सिर पर बोझ बढ़े तो हमें धैर्य रखना चाहिए |


घ.  नभ का फैलाव बहुत है, उससे हम क्या सीखें ?

उ : नभ का फैलव बहुत है, उससे हम यह सीखें कि –हम जीवन में अच्छा कर्म करेंगे असीम अनंत नभ कि तरह हमारा गौरव सारा संसार में फैल जाएगा |


ङ.   मीठी – मीठी मृदुल उमंग का क्या अर्थ है ?

मीठी – मीठी मृदुल उमंग का अर्थ जीवन का आनंद उल्लास भरे मधुर पल हैं |



3. पंक्तियों को पूरा किजिए :


    i.   पर्वत कहता शीश उठाकर |

   ii.   तुम भी ऊंचे बनजाओ |

  iii.   नभ कहता है फैलो इतना |

  iv.   भर लो, भर लो अपने मन में |



4. इन पंक्तियों के अर्थ समझाइए |


    i.   नभ कहता है फैलो इतना

ढक लो तुम सारा संसार |

उ : आसमान कहता है कि मेरी तरह इतना विशाल हृदय बनो कि उसमें सारे संसार को जगह मिल जाये अर्थात् सारा संसार उसमें समा जाए |


   ii.   भर लो, भर लो, अपने मन में

मीठी – मीठी मृदुल उमंग |

उ : अपने मन में मीठी – मीठी उमंग भर लो अर्थात् मन में मीठी – मीठी अरमान भर लो |


5. “क” स्तम्भ के शब्दों के साथ “ख” स्तम्भ के शब्दों को जोड़ीए :


“क”      “ख”

पृथ्वी      धैर्य

पर्वत      ऊंचाई

सागर      गहराई

तरंग      उमंग

आकाश     विस्तार

 


भाषाकार्य


1. पर्यायवाची शब्द लेखिए :


पर्वत – पहाड़

नभ – आकाश

संसार – विश्व

मृदुल – कोमल

पृथिवी – धरती

सिर – मस्तक

सागर – समुद्र

तरंग – लहर



2. विपरीतार्थक शब्दों लिखिए :


उठाना – वैठाना

मृदुल – कठिन

गहरा – ऊंचा

धैर्य – अधैर्य

ढकना – उघाड़ना

समझ – नासमझ



3. इन शब्दों को लगाकर वाक्य बनाइए :


लहर – सागर में लहर उठती है |


सारा – बिल्ली सारा दूध पी गई |


भार – हमें अपना भार खुद उठाना चाहिए |


तरंग – तालाब में पत्थर फेंकने पर तरंग उठती है |


उमंग – मन में उमंग जगती है |

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